Sunday, October 20, 2013

karwa chauth..ka vrat ,poojaa

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को स्त्रियाँ पति की लम्बी आयु ,स्वास्थ्य और मंगलकामना के लिए करवा चौथ का व्रत करती हैं। इस व्रत का फल शुभ और सौभाग्य को देने वाला माना गया है । इस व्रत को रखने वाली स्त्री प्रातः काल में जलपान ग्रहण करने के उपरांत व्रत का संकल्प लेती अं और सायंकाल चंद्रोदय के उपरांत पूजा करके चन्द्र दर्शन करके पति के हाथ से जल ग्रहण करती है । 

कथा ------

एक बार अर्जुन नीलगिरी पर्वत पर तपस्या करने गए। द्रोपदी ने सोच की यहाँ हर वक्त विघ्न -बाधाएं आती रहती हैं ,उनके शयन के लिए कोई उपाय करना चाहिए तब उन्हें भगवान् कृष्ण का ध्यान किया। श्री कृष्ण जी ने कहा -पर्वत्री जी ने भी शिव जी से यही प्रश्न किया था तब न्होंने करवा चौथ का व्रत करने को कहा था जिसकी कथा और विधान में तुमको बताता हूँ

१. प्राचीन काल में धर्मपरायण ब्राह्मण के सात पुत्र तथा एक पुत्री थी ,बड़ी होने पर ब्राह्मण ने उसका विधिवत विवाह कर दिया। विवाह के पश्चात उसने करवा चौथ का व्रत रखा। सात भाइयों की लाडली बहन चंद्रोदय से पहले ही भूख से व्याकुल होने लगी ,यह देखकर भाइयों से उसकी ऐसी अवस्था देखी  न गयी और उन्होंने कुछ सोचते हुए चंद्रोदय से पहले ही भोजन करने की सोची और तब उन्होंने पीपल की आड़ से चलनी में दिया रख कर चन्द्रोदय  होने की बात कही। 
और कहा उठो बहन अर्घ्य देकर भोजन कर लो ,बहन ने अर्घ्य देकर भोजन कर लिया तभी उसके पति के प्राण पखेरू हो गए। यह देखकर वह रोने -चिल्लाने लगी। रोने की आवाज सुनकर देवदासियों ने आकर रोने का कारन पूछा तो ब्राह्मण की कन्या ने सब हाल कह सुनाया !तब देवदासियां बोली तुमने चंद्रोदय से पहले ही अन्न -जल ग्रहण कर लिया जिसके कारन तुम्हारे पति की मृत्यु हुई है। यदि अब तुम मृत पति की सेवा करती हुई बारह महीनों तक प्रत्येक चौथ का व्रत विधिपूर्वक करो और करवा चौथ का व्रत यथाविधि करो तो तुम्हारे पति अवश्य जी उठेंगे। 
ब्राह्मण की पुत्री ने वैसा ही किया जैसा की देवदासियां कह कर गयीं थीं तो उसका पति जीवित हो उठा । 
इस प्रका कथा कह कर श्रीकृष्ण ने द्रोपदी से कहा तुम भी इसी प्रका व्रत करोगी तो तुम्हारे सरे दुःख दूर होंगे। 

२.  एक ब्राह्मण परिवार में सात बहुएँ थीं उनमें से छः बहुएं बहुत अमीर मायके की थी मगर सातवीं बहु निर्धन परिवार से थी ,वह घर का सारा काम काज करती थी और सबकी सेवा करती रहती थी। 
तीज -त्यौहार पर जब उसके मायके से कोई न आता तो वह बहुत दुखी होती थी।  करवा चौथ पर वह दुखी होकर घर से निकल पड़ी और जंगल में जाकर वृक्ष के नीचे बैठ कर रोने लगी। तभी बिल से सांप निकल और उके रोने का  कारन पूछा ----तब छोटी ने सारी बात कही।  नाग को उस पर दया आगई और बोल तुम घर चलो मैं अभी करवा लेकर आता हूँ। 
नाग देवता करवा लेकर उसके घर पहुंचे। सास प्रसन्न हो गयी। सास ने प्रसन्न मन से छोटी को नाग के साथ उसके घर भेज दिया।  नाग देवता ने छोटी को अपना सारा महल दिखया और कहा -जितने दिन चाहो यहाँ आराम से रहो!
एक बात याद रखना -सामने रखी नांद कभी मत खोलना।  एक दिन उत्सुकता वश छोटी ने जब घर पर कोई नहीं था उस नांद को खोल कर देखना चाहा परन्तु उसमें से छोटे-छोटे नाग के बच्चे निकल कर इधर-उधर रेंगने लगे। उसने जल्दी से नांद को ढक दी ,जल्दी में एक सांप की पूँछ कट गयी ,शाम को नाग के आने पर उसने अपनी गलती स्वीकार ली और आज्ञा लेकर अपने घर वापस चली गयी ,उसकी ससुराल में बड़ी इज्जत होने लगी। 
जिस सांप की पूछ कटी थी उसने जब अपनी माँ से पूछ की मेरी पूँछ कैसे कटी ? माँ ने बताया तो वह बोल मैं बदला लूँगा ,माँ के बहुत समझाने पर भी वो छोटी के घर गया और चुप कर बैठ गया। 
वहां उसकी सास से किसी बात पर सास से बहस हो रही थी और छोटी बार-बार कसम खाकर कह रही थी की मैंने ऐसा कुछ नहीं किया ,"मुझे बंदा  भैया से प्यारा कोई नहीं मैं उनकी कसम खाकर कह रही हूँ मैंने ऐसा नहीं किया" यह सुनकर बंडा सोचने लगा ये मुझे इतना प्यार करती है और मैं इसे मारने चला था और वो वहां से चला गया । तभी से बंडा भैया करवा लेकर जाने लगे । 

              इस वर्ष करवा चौथ का व्रत २२ अक्टूबर २०१३ को पड़  रहा है ।





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