Wednesday, November 13, 2013

kartik poornima/ कार्तिक पूर्णिमा / 25 November 2015

कार्तिक पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में बहुत महत्त्व है.पुराणों में मान्यता है कि आज के दिन शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था अतः अगर इस दिन कृतिका नक्षत्र हो तो इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा कहते हैं और इस दिन इसका महत्त्व और भी बढ़ जाता है।
वर्ष २०१५ में २५ नवम्बर को यह पूर्णिमा पड़ेगी -
मत्स्यपुराण के अनुसार इस दिन भगवान् विष्णु ने  प्रलय काल में वेदों की रक्षा करने के लिए मत्स्य अवतार लिया था .इस  दिन दान -स्नान तथा दीप दान का विशेष महत्त्व है।
इस दिन चंद्रोदय पर शिवा ,सम्भूति।,संतति ,प्रीती ,अनुसूया ,और क्षमा इन छः कृतिकाओं का पूजन और वृष दान से शिवपद की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में वर्णित है कि कार्तिक पुर्णिमा  के दिन पवित्र नदी व सरोवर एवं धर्म स्थान में जैसे, गंगा, यमुना, पुष्कर, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरूक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. महर्षि अंगिरा ने स्नान के प्रसंग में लिखा है कि यदि स्नान में कुशा और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाए तो कर्म फल की प्राप्ति नहीं होती है.

कथा ---

एक बार त्रिपुर राक्षस ने एक लाख वर्ष तक प्रयागराज में घोर तप किया ,इस तप से  समस्त जड़ ,चेतन ,जीव तथा देवता भयभीत हो गए। देवताओं ने तप भंग करने के लिए अप्सराएं भेजीं पर उन्हें भी सफलता नहीं मिली। ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दिया था कि वह देवता से मरे और न ही मनुष्य से।
और इस वरदान के कारण त्रिपरसुर ने निडर हो अत्याचार करना शुरू कर दिया तब महादेव तथा त्रिपुरासुर का घमासान युद्ध हुआ, अंत में शिव जी ने विष्णु जी  की सहायता से उसका अंत कर दिया !तभी से इस दिन का महत्त्व बढ़ गया और इस दिन को दीपावली से ही सामान मनाया जाता है।
 कार्तिक पूर्णिमा का दिन सिख सम्प्रदाय के लोगों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था. सिख सम्प्रदाय को मानने वाले  पूरे कार्तिक माह में सुबह स्नान कर गुरूद्वारों में जाकर गुरूवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताये रास्ते पर चलने की सगंध लेते हैं.तथा प्रभात फेरियां करते हैं। इस दिन कढ़ाव प्रसाद बना कर वितरित करते हैं।
कार्तिक माह में रामायण का अध्धययन करने से बहुत पुण्य प्राप्त होता है। कुछ लोग पूरे कार्तिक में कार्तिक महात्म्य कि पुस्तक का पाठ करते हैं।
पूरे कार्तिक मास में तुलसी पूजन का विशेष महत्त्व  है, तुलसी पर दीप जलना, तुलसी विवाह आदि की परम्परा बहुत पुरानी है, एकादशी से पूर्णिमा तक किसी भी दिन तुलसी विवाह किया जाता है, परन्तु अधिकतर घरों व् मंदिरों में प्रबोधिनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया जाता है।

1 comment:

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