Saturday, February 8, 2014

जया एकादशी पूजा ,कथा

जया एकाद्शी व्रत माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकाद्शी को किया जाता है।  श्री कृष्ण जी बोले -हे धर्म पुत्र! माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम जाया है। 
इस वर्ष यह एकादशी १० फरवरी २०१४ को पड़  रही है ,और इस दिन धूप -दीप से भगवान् की पूजा की जानती है। 


 यह एकादशी सभी पापों को हरने वाली और उतम कही गई है. पवित्र होने के कारण यह उपवासक के सभी पापों का नाश करती है. तथा इसका प्रत्येक वर्ष व्रत करने से मनुष्यों को भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है. 

कथा --------

 एक समय की बात है, इन्द्र की सभा में एक गंधर्व गीत गा रहा था. परन्तु उसका मन अपनी प्रिया को याद कर रहा है. इस कारण से गाते समय उसकी लय बिगड गई. इस पर इन्द्र ने क्रोधित होकर उसे श्राप दे दिया, कि तू जिसकी याद में खोया है. वह राक्षसी हो जाए. 

देव इन्द्र का श्राप  सुनकर गंधर्व ने अपनी गलती के लिये इन्द्र से क्षमा मांगी  ,  और देव से विनिती की कि वे अपना श्राप वापस ले लें. परन्तु देव इन्द्र पर उसकी प्रार्थना का कोई असर न हुआ. उन्होने उस गंधर्व को अपनी सभा से बाहर निकलवा दिया. गंधर्व सभा से लौटकर घर आया तो उसने देखा की उसकी पत्नी वास्तव में राक्षसी हो गई.
अपनी पत्नी को श्राप मुक्त करने के लिए, गंधर्व ने कई यत्न किए. परन्तु उसे सफलता नहीं मिली. अचानक एक दिन उसकी भेंट ऋषि नारद जी से हुई. नारद जी ने उसे श्राप से मुक्ति पाने के लिये माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत  करने की सलाह दी। 
नारद जी के कहे अनुसार गंधर्व ने एकाद्शी का व्रत किया. व्रत के शुभ प्रभाव से उसकी पत्नी राक्षसी देह से छुट गई ॥ 

अतः जो मनुष्य यत्न के साथ विधिपूर्वक इस व्रत को करता है और रात्रि जागरण करता है उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते है और अंत में स्वर्गलोक को प्राप्त होता है । 

                       इस दिन शुद्ध गिरी का सागर लिया जाना चाहिए ॥ 

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