Monday, May 19, 2014

अपरा / अचला एकादशी व्रत पूजा



अपरा एकादशी ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है ,इस व्रत के करने से ब्रह्मा हत्या ,परनिंदा ,भूतयोनि जैसे निकृष्ट कर्मों से भी छुटकारा मिलता है। जो फल बद्रिकाश्रम में निवास करने से मिलता है और जो फल सूर्यग्रहण में कुरक्षेत्र में स्नान से मिलता है वह फल इस एकादशी के व्रत से मिलता है। 

इस वर्ष अपरा एकादशी का व्रत दिनांक २४ मई २०१४ को मनाया जायेगा। 

महत्व -----

इसके करने से कीर्तिपूर्ण तथा धन की प्राप्ति होती है ,यह व्रत मिथ्यावादियों,जालसाजियों ,कपटियों तथा ठगों के घोर पापों से मुक्ति दिलाने वाला होता है । 

पूजन विधि-----

इस एकादशी में मलयगिरि चन्दन ,तुलसी तथा कपूर से गंगा जल सहित  भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए ,कहीं-कहीं पर भगवान कृष्ण और बलराम  की पूजा भी की जाती है। 

कथा --------

प्राचीन कल में महीध्वज नाम का एक धर्मात्मा राजा था जिसका छोटा भाई बड़ा ही क्रूर और अधर्मी  था ,वह  अपने बड़े भाई के साथ द्वेष रखता था ,उस अवसरवादी पापिष्ट ने एक दिन रात्रि में बड़े भाई की हत्या करके उसकी देह को जंगली पीपल के वृक्ष के नीचे गाड़ दिया ,मृत्यु के उरान्त वह राजा प्रेतात्मा के रूप में पीपल पर निवास करने लगा ,वह बड़े ही उत्पात मचाता था। अचानक एक दिन धौम्य नामक ऋषि वहां से गुजरे ,उन्होंने तपोबल से प्रेत का उत्पात का कारण जाना तथा जीवन का वृतांत समझा। ऋषि ने प्रसन्न होकर उस प्रेत को पीपल से उतारा तथा परलोक विद्या का उपदेश दिया ,अंत में इस प्रेतात्मा  होने  इसे अचला एकादशी का व्रत करने को कहा ,इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से वह राजा दिव्य शरीर वाला होकर स्वर्ग में चला गया। 

                                इस दिन ककड़ी का सागर लिया जाना चाहिए 

  

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