Wednesday, June 4, 2014

nirjala ekadashi/निर्जला एकादशी

एकादशी का व्रत सभी व्रतों से श्रेष्ठ माना जाता है, साल भर में २४ एकादशी पड़ती हैं और जिस वर्ष मलमास  पड़ता है उस वर्ष २ एकादशी और बढ़ जाती हैं परन्तु इनमें से कुछ एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है ,देवशयनी एकादशी ,देवउठावनी एकादशी और  एकादशी।
निर्जला एकादशी के व्रत में पूरे दिन बिना पानी पिए विष्णु की उपासना पूजा  व्रत को पूर्ण विधि के साथ रखने का विधान है ,परन्तु अत्यधिक गर्मी के कारण अधिकतर लोग इसे इस तरह से नहीं रखते हैं, मैं भी इस व्रत को पानी पीकर ही रखती हूँ ,फिर भी इस व्रत का विशेष महत्त्व माना गया है।
जरूरी यह नहीं की आप व्रत कैसे रखते हैं ,जरूरी है व्रत रहने की भावना और उपासना।
यूँ तो किसी भी एकादशी के व्रत में अन्न का निषेध है परन्तु निर्जला एकादशी के व्रत में अन्न के साथ-साथ जल का आचमन तक निषिद्ध है।

वर्ष २०१६ में यह एकादशी दिनांक १६ दिन वीरवार को पड़ रहा है -



निर्जल एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है । इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है ।

इस दिन   स्नान आदि से निवृत होकर विष्णु भगवान् का पूजन करें ,और पितरों के निमित्त पंखा,छाता ,सोना चांदी , मिटटी घड़ा ,फल इत्यादि का दान करना चाहिए .संध्या काल में जो फलहार लेना चाहें मीठा फलहार लेकर ,रात्रि जागरण करें और साथ कीर्तन भी करें ।ॐ  नमो भगवते वासुदेव का जप करें ।
द्वादशी को स्नान से निवृत होकर ब्राम्हणों को दान और भोजन कराकर स्वयं भोजन ग्रहण करें .
इस एकादशी के माहात्म्य सुनने वाले को भी बहुत पुण्य  मिलता है ।


कथा -----

पांच पांडवों में भीम के अतिरिक्त सभी पांडव और माता कुंती के साथ द्रोपदी भी एकादशी का व्रत करते थे ,मगर भीम सेन अपनी पेट की अग्नि के कारण  व्रत रखने में असमर्थ थे ,जिसके कारण सभी उसे  शिक्षा देते थे अतः भीम परेशान होकर महर्षि व्यास के पास गए और बोले पुज्य ऋषिवर मेरे भाई व् माताजी एकादशी का व्रत करते हैं और मुझे भी व्रत के लिए कहते हैं ,परन्तु मैं बिना अन्न के नहीं रह पाता हूँ ,मेरे पेट में अग्नि का वास होने के कारण मैं व्रत नहीं रह पाता ,आप कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी टूट जाये ।
तब व्यास जी ने कहा " जो भी कोई ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करता है उसे २ ४ एकादशी के व्रत का फल प्राप्त होता है ,अतः तुम इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करो । इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोक्ष को प्राप्त होता है ।
व्यास जी की आज्ञानुसार भीमसेन ने इस व्रत को किया और मोक्ष को प्राप्त किया।
  आप सभी को इस एकादशी की बहुत-बहतु शुभकामनाएं। ....
व्रत कैसे रखना है ये सब अपने-अपने सामर्थ्य और सुविस्ता के अनुसार ही रखना चाहिए ।

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