Sunday, September 27, 2015

Tata Sky Transfer manoranjan ki duniya ka naya tohfa

मनोरंजन की दुनिया में एक सफलतम नाम है टाटा स्काई का, एक वो वक़्त था जब हम सिर्फ केबल के कनेक्शन से ही अपना मनोरंजन कर पाते थे पर आज डिश सिस्टम के कारन हम अपने मनपसंद धारावाहिक, मनपसंद फिल्म को भी काम पैसों में अपने परिवार के साथ बैठ कर देख सकते हैं.
टाटा स्काई सबसे बेहतर विकल्प है जिसके कनेक्शन को लगवा कर हम अपना मनोरंजन कर सकते हैं ।
आज की व्यस्तम जिंदगी में हम कभी- कभी अपने मनपसंद शो या मूवी नहीं देख पाते हैं,
https://www.youtube.com/watch?v=BVXkU9VJ_MQ 
कभी ऐसा सोचते हैं की न जाने मैच में क्या हो रहा होगा, ऐसे में .Tata Sky के Tata Sky Transfer. के बारे मैं मालूम चला, जिसे अपने स्मार्ट फ़ोन पर इस्तेमाल कर अपनी मनपसंद मूवी या धारावाहिक या मैच देखने की सुविधा हो गयी है.
यदि आप भी अपने स्मार्ट फ़ोन से प्यार करते हैं तो अपने फ़ोन में Tata Sky Transfer  
के विकल्प का इस्तेमाल करें और अपने पसंदीदा प्रोग्राम का लुत्फ़ उठाएं।  
हमारे घर पर काफी समय से टाटा स्काई है, और टाटा स्काई के हस्तांतरण सुविधा से हम अपने मनपसंद प्रोग्राम को अपने लैपटॉप, स्मार्ट फ़ोन पर ट्रांसफर कर समय मिलने पर देखते हैं। 
सबसे अच्छी बात यह की किसी फंक्सन में जाने के कारन हमारे जो शो मिस हो जाते हैं उनका भरपूर आंनद हम Tata Sky Transfer  की सुविधा से ले पाते हैं। 
कीमत भी इतनी नहीं है की आप इसके इस्तेमाल से घबराएं, सिर्फ ९,३००। 
मेरा मानना है आप सभी भी इस सुविधा का इस्तेमाल करें और अपने सभी मनपसंद शो, न्यूज़, मैच का भरपूर आनंद उठाएं।

Monday, September 21, 2015

पद्मा /पदमा /परिवर्तिनी/वामन एकादशी एकादशी व्रत कथा

भाद्रपक्ष की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी के नाम से जाना जाता है, इस एकादशी की पूजा करने से बाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस एकादशी को वामन एकादशी भी कहा जाता है। 

 

कथा -------

त्रेता युग में प्रहलाद के पौत्र राजा बलि राज्य करता था ,ब्राह्मणों का सेवक था और भगवान् विष्णु का परम भक्त था । मगर इन्द्रादि देवताओं का शत्रु था । अपने भुज बल से देवताओं को विजय करके स्वर्ग से निकाल दिया था । देवताओं को दुखी देखकर भगवन विष्णु में वामन का स्वरुप धारण किया और राजा  बलि के द्वार पर आकर खड़े हो गए और कहा मुझे तीन पग प्रथ्वी का दान चाहिए , बलि बोले --"तीन पग क्या मैं तीन लोक दान कर सकता हूँ " 

भगवान् ने विराट रूप धारण किया ,२ लोकों को २ पग में ले लिए ,तीसरा पग राजा बलि के सर पर रखा जिसके कारण पातळ लोक चले गए । 

जब भगवान् वामन पैर उठाने लगे तब बलि ने उनके चरणों को पकड़कर कहा इन्हें मैं मंदिर में रखूंगा । 

तब भगवान् बोले -"यदि तुम वामन एकादशी का व्रत करोगे तो में तुम्हारे द्वार पर कुटिया बनाकर रहूँगा। "

राजा बलि एकादशी का व्रत विधिपूर्वक किया और कहा जता है की तभी से भगवान् की एक प्रतिमा पातळ लोक में द्वारपाल बनकर निवास करने लगी और एक प्रतिमा छीर सागर में निवास करने लगी ।

 इस दिन भगवन विष्णु की पूजा का विधान है साथ ही इस दिन ककड़ी का सागर लिया जाना चाहिए । 

हम गृहस्थ आश्रम में रहकर जितनी विधि - विधान से पूजन कर सकते हैं करना चाहिए, ईश्वर ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है की आप पूरी विधि का ही पालन करें हाँ, सभी पूजन में साफ- सफाई का ध्यान अवश्य किया जाना चाहिए ।