Sunday, December 20, 2015

मोक्षदा एकादशी 21 December 2015 monday

मार्गषीस के शुक्ल पक्ष को पड़ने वाली एकादशी का नाम मोक्षदा एकादशी है, मोक्षदा एकदशी के दिन ही गीता जयंती मनाई जाती हैं इस दिन भगवान कृष्ण के मुख से पवित्र भगवत गीता का जन्म हुआ था, मोक्षदा एकादशी का सार भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं अर्जुन से कहा था |
  इस दिन श्री कृ्ष्ण व गीता का पूजन करना चाहिए. इसके बाद आरती करके उसका पाठ करना चाहिए. मोक्षदा एकाद्शी को दक्षिण भारत में वैकुण्ठ एकादशी के नाम से भी जाना जता है।
 गीता में भगवान श्री कृ्ष्ण ने कर्मयोग पर विशेष बल दिया है. ब्राह्राण भोजन कराकर दान आदि कार्य करने से विशेष फल प्राप्त होते है. वर्ष २०१५ में यह एकादशी २१ दिसम्बर दिन सोमवार को पड़ रही है।  मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी अनेकों पापों को नष्ट करने वाली है. यह एकादशी मोक्षदा के नाम से प्रसिद्ध है. इस दिन भगवान श्री दामोदर की पूजा, धूप, दीप नैवेद्ध आदि से भक्ति पूर्वक करनी चाहिए ।

इस एकादशी की कथा इस प्रकार है ----

 
चंपा नगरी नाम के एक राज्य में एक प्रतापी राजा जिनका नाम वैखानस था,  रहा करते थे.जो की बहुत प्रतापी एवं धार्मिक राजा थे । इसी कारण प्रजा में भी खुशहाली थी | कई प्रकांड पंडित व् ब्राह्मण उसके राज्य में निवास करते थे। 
एक दिन राजा को स्वपन दिखा जिसमे उनके पिता नरक की यातनायें झेल रहे हैं, ऐसा स्वपन देखने के बाद राजा बैचेन हो उठे और सुबह होते ही उसने अपनी पत्नी से अपने स्वप्न का विस्तार से बखान किया ।  राजा ने यह भी कहा इस दुःख के कारण मेरा चित्त कहीं नहीं लग रहा मैं इस धरती पर सम्पूर्ण ऐशो आराम में हूँ और मेरे पिता कष्ट में हैं ।  यह जानने के बाद मेरा चित्त बहुत व्याकुल हो रहा है, कृपा कर मुझे इसका हल बतायें । पत्नी ने कहा कि महाराज आपको आश्रम में जाना चाहिये |
राजा आश्रम गए।  वहाँ कई सिद्ध गुरु थे सभी अपनी तपस्या में लीन थे । 
 महाराज पर्वत मुनि के पास गए उन्हें प्रणाम किया और समीप बैठ गए,  पर्वत मुनि ने मुस्कुराकर आने का कारण पूछा , "राजा अत्यंत दुखी थे उनकी आँखों से अश्रु की धार लग गई, तब पर्वत मुनि ने अपनी दिव्य दृष्टी से सम्पूर्ण सत्य देखा और राजा के सर पर हाथ रखा और यह भी कहा तुम एक पुण्य आत्मा हो जो अपने पिता के दुःख से इतने दुखी हो ।  तुम्हारे पिता को उनके कर्मो का फल मिल रहा हैं । उन्होंने तुम्हारी माता को तुम्हारी सौतेली माता के कारण बहुत यातनाये दी , इसी कारण वे इस पाप के भागी बने और नरक भोग रहे हैं |राजा ने पर्वत मुनि से इस दुविधा के हल पूछा इस पर मुनि ने उन्हें मोक्षदा एकादशी व्रत पालन करने एवम इसका फल अपने पिता को देने का कहा । राजा ने विधि पूर्वक अपने कुटुंब के साथ व्रत का पालन किया और अपने पिता को इस व्रत का फल अपने पिता के नाम से छोड़ दिया जिस कारण उनके पिता के कष्ट दूर हुये और उन्होंने अपने पुत्र को आशीर्वाद दिया॥

 इस भगवान विष्णु के साथ दामोदर एवम कृष्ण की भी पूजा की जाती हैं। 
 इस दिन तुलसी पत्र व् मंजरी से पूजन किया जाना अति उत्तम माना गया है साथ ही बेल पत्र का सागार लेना चाहिए ।