Wednesday, June 29, 2016

भजन



तेरा पल -पल बीता जाए मुख से जप लो नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय -

१. शिव- शिव तुम ह्रदय से बोलो, मन मंदिर का पर्दा खोलो -२
                             तेरा अवसर खाली न जाये, मुख से जप लो नमः शिवाय ----

२. ये दुनिया पंक्षी का मेला, समझो उड़ जायेगा अकेला -२
                           तेरा तन मन साथ न जाये, मुख से जप लो नमः शिवाय -----

३.मुसाफिरी जब पूरी होगी, चलने की मजबूरी होगी -२
                        पिंजरा प्राण रह जाये, मुख से जप लो नमः शिवाय ----

४. शिव पूजन मस्त बने जा, भक्ति सुधा रस पान किये जा -२
                      दर्शन विश्व्नाथ के पाये, मुख से जप लो नमः शिवाय ------------

Saturday, June 25, 2016

भजन




गोविन्द गा ले गोपाल गा, जीवन की नैया किनारे लगा ले --
१. दुनिया के साथी सबसे निराले, 
                      बाहर से उजले अंदर से काले, गोविन्द ------
२. भाई सम्हाले, न बेटा सम्हाले, 
                    एक दिन करेंगे ये यम के हवाले, गोविन्द 
३. संग चलेंगे न महल अटारी , 
                    मरने के पीछे निकाले अकेले, गोविन्द ----
४. पागल अभागा गफ़लत न जाने,
                   एक दिन पड़ेगा अग्नि के पाले, गोविन्द -------

Monday, June 20, 2016

bhajan






नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोविंदा -
१. तू ही नटवर, तू ही नागर, तू ही बाल मुकुंदा -
                    भजो रे मन गोविंदा
२.सब देवन में कृष्ण बड़े हैं, ज्यूँ तारा विच चन्दा --
                   भजो रे मन गोविंदा ----
३. सब सखियन में राधा जी बड़ी हैं, ज्यूँ नदिया विच गंगा -
                  भजो रे मन गोविंदा ----
४. ध्रुव तारे प्रह्लाद उबारे, नरसिंह रूप धरन्ता -
                 भजो रे मन गोविंदा -------
५.कालीदह में नाग जो नाथो, फर्ण फर्ण करत निरन्ता --
                  भजो रे मन गोविंदा ------
६. वृंदावन में रास रचायो, नाचत बाल मुकुंदा ----
                  भजो रे मन गोविंदा ---
७. मीरा के प्रभु गिरधर नागर, काटो जम का फंदा -
                भजो रे मन गोविंदा ----

Thursday, June 16, 2016

bhajan

                  न जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं -----
                   हर भक्त कहते हैं, यही सद्ग्रन्थ गाते हैं ---

१. नहीं स्वीकार करते है निमंत्रण नृप द्रुयोधन का,
                                        विदुर के घर पहुंचकर भोग छिलकों का लगाते हैं -----

२. न आये मधुपुरी से गोपियों की दुःख कथा सुनकर,
                                       द्रुपद जां की दशा पर द्वारिका से दौड़े आते हैं------

३. न रोये वन गमन में श्री पिता की वेदनाओं पर,
                                      उठाकर गीध को निज गोद में आँसू बहते हैं ---

४. कठिनता से चरण धोकर मिले कुछ बिंदु विधि हरी को,
                                    चरणोदक स्वयं केवट घर जाकर लुटाते हैं ---------