Thursday, September 1, 2016

भजन


         

                      बन के लिल्हारी राधा को छलने चले, वेष उनका बनाना गजब हो गया,
                      जुल्म ढाती थीं जो चोटियां श्याम की, मांग सेन्दुरा भराना गजब हो गया --


१. आसमान पर सितारे लरजने लगे, चाँद बदली में मुंह को छिपाने लगा,
                  चांदनी रात में बेखबर बाम पर, बेनकाब उनका आना गजब हो गया ---

२. बिछड़ी जिस दम मिली थी नज़र से नज़र, जान राधा गयीं छल किया आन कर,
                   बहुत शर्मिंदा थीं राधिका उस घड़ी, श्याम का मुस्कुराना गजब हो गया-

३. हाथ गालों पे जिस दम धरा श्याम ने, हाथ झलककर के राधा ये कहने लगीं,
                  सच बता दे अरे छलिया तू कौन है, तुमसे नज़रें मिलाना गजब हो गया-

४. तेरा प्रेमी हूँ अच्छी तरह जान ले, मैं हूँ छलिया किशन मुझको पहचान  ले,
                तेरी खातिर मैं राधा जनाना बना, प्रेम तुमसे बढ़ाना गजब हो गया ----

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